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रिपोर्ट: अमित पवार
प्रधान संपादक, खबर ताज़ा

होली के त्योहार में अब कुछ ही दिन शेष हैं, ऐसे में रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए बिलासपुर के नागरिकों के पास इस बार एक सुरक्षित और बेहतरीन विकल्प मौजूद है। जिला पंचायत कार्यालय के सामने ‘बिहान’ योजना से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने हर्बल गुलाल का स्टॉल लगाया है, जिसे शहरवासियों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
केमिकल नहीं, फूलों और अरारोट का जादू
चकरभाठा क्षेत्र के राधा कृष्ण स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार किया गया यह गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक है। समूह की सदस्य श्रीमती सीमा तिवारी और श्रीमती रिंकी श्रीवास ने बताया कि बाजार में मिलने वाले मिलावटी और केमिकल युक्त रंगों से त्वचा और आंखों को होने वाले नुकसान को देखते हुए उन्होंने यह पहल की है।
आधार सामग्री: इस गुलाल को बनाने में अरारोट का उपयोग किया गया है।
सुरक्षा: इसमें किसी भी प्रकार के सिंथेटिक कलर का प्रयोग नहीं है, जिससे यह बच्चों की कोमल त्वचा के लिए भी सुरक्षित है।
खासियत: इसकी बनावट अत्यंत मुलायम है और खुशबू प्राकृतिक है।

सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम
बिहान योजना ने ग्रामीण महिलाओं को न केवल हुनर दिया है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बनाया है। स्टॉल पर मौजूद दीदियों ने बताया कि शासन से मिलने वाली सहायता और ऋण की बदौलत वे अब खुद का व्यवसाय चला रही हैं। त्योहारों के समय ऐसे उत्पाद तैयार करने से उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनके परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आया है।

मुख्यमंत्री का जताया आभार
महिला समूहों ने छत्तीसगढ़ के बजट में स्व-सहायता समूहों के लिए किए गए विशेष प्रावधानों और महिला सशक्तिकरण की योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। दीदियों का कहना है कि सरकार के इन प्रयासों से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है।
नोट: यदि आप भी अपनों की होली को सुरक्षित और रंगीन बनाना चाहते हैं, तो यह स्टॉल 3 मार्च को भी जिला पंचायत कार्यालय के सामने उपलब्ध रहेगा।


अमित पवार
प्रधान संपादक
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