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राज किशोर नगर की गलियों से ITBP के बर्फीले पहाड़ों तक: पिता के अनुशासन और माँ के त्याग ने लिखी सफलता की नई इबारत
प्रस्तुति:
अमित पवार
प्रधान संपादक, खबर ताज़ा
(खबर भी, खौफ़ भी, सच्चाई भी)

बिलासपुर।
कहते हैं कि बेटियां घर की रौनक होती हैं, लेकिन जब वही बेटी कंधे पर सितारे और बदन पर वर्दी सजाकर अपने पिता को ‘सैल्यूट’ करती है, तो वह मंजर पूरे शहर का सीना गर्व से चौड़ा कर देता है। न्यायधानी के राज किशोर नगर की एक होनहार बिटिया ने कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की सबसे कठिन ट्रेनिंग पूरी कर अब यह बेटी देश की उन सरहदों की हिफाजत करेगी, जहाँ तापमान शून्य से भी कई डिग्री नीचे रहता है।
वो एक सैल्यूट और नम आंखें…
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक तस्वीर खूब सुर्खियां बटोर रही है, जिसमें वर्दी में सजी बेटी अपने पिता को गौरव के साथ सैल्यूट कर रही है। यह महज एक तस्वीर नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या का परिणाम है। एक पिता के लिए इससे बड़ा पुरस्कार क्या होगा कि जिस उंगली को पकड़कर बेटी ने चलना सीखा, आज उसी हाथ से वह देश की रक्षा की शपथ ले रही है।

बचपन का सपना, फौलादी इरादे
‘खबर ताज़ा’ से विशेष चर्चा के दौरान बिटिया ने बताया कि स्कूल के दिनों से ही खाकी और तिरंगे के प्रति उनका आकर्षण था। ITBP की ट्रेनिंग, जिसे दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रेनिंग में गिना जाता है, वहां के ऊंचे पहाड़ और हाड़ कंपा देने वाली ठंड भी इस बेटी के हौसलों को डिगा नहीं पाई। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो राज किशोर नगर जैसी छोटी जगह से निकलकर भी देश के सर्वोच्च शिखर तक पहुँचा जा सकता है।

प्रतिभा जी का संघर्ष और पिता का संबल
इस कामयाबी के पीछे सिर्फ बेटी की मेहनत नहीं, बल्कि माता-पिता का अटूट विश्वास भी है। माता प्रतिभा जी ने अपनी व्यस्तताओं के बीच बेटी के सपनों को कभी कुम्हलाने नहीं दिया। उन्होंने न केवल उसे प्रोत्साहित किया, बल्कि समाज की रूढ़ियों से परे उसे देश सेवा के लिए समर्पित किया। वहीं, पिता की आंखों में आज जो चमक है, वह उस संतुष्टि की है जो एक सफल परवरिश के बाद ही मिलती है।

बेटियों के लिए संदेश: ‘डर को अपनी ताकत बनाओ’
आजकल की युवा पीढ़ी, जो फिजिकल और मेडिकल की चुनौतियों से डरकर कदम पीछे खींच लेती है, उनके लिए इस जांबाज बेटी का एक ही गुरुमंत्र है— “मैदान में हारने से पहले इंसान मन से हारता है, जिस दिन मन पर जीत पा ली, वर्दी आपकी होगी।”

अब यह बेटी LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) की उन दुर्गम चोटियों पर तैनात होगी, जहाँ परिंदा भी पर मारने से पहले सोचता है। ‘खबर ताज़ा’ के माध्यम से उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि जब तक सरहद पर देश की बेटियां तैनात हैं, हर भारतीय चैन की नींद सो सकता है।
इस रिपोर्ट से संबंधित संपूर्ण साक्षात्कार देखे YouTube Channel खबर ताज़ा न्यूज पर शाम 7:30 बजे

अमित पवार
प्रधान संपादक
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