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आत्म-निर्भरता की नई उड़ान: मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल ने बदली बृहस्पति और विष्णु की जिंदगी

रिपोर्ट :- अमित पवार प्रधान संपादक खबर ताजा न्यूज

जीवन की कठिनाइयाँ जब हौसलों के आगे घुटने टेक देती हैं, तो कामयाबी की नई इबारत लिखी जाती है। बिलासपुर जिले के दो दिव्यांग हितग्राहियों—श्रीमती बृहस्पति साहू और श्री विष्णु सिंह राजपूत—ने समाज कल्याण विभाग की मदद से मिली मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल के जरिए अपनी आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिखी है। अब उनके जीवन की डोर किसी और के हाथ में नहीं, बल्कि खुद उनके अपने नियंत्रण में है।

अवरोधों को पीछे छोड़, स्वावलंबन की राह पर

​मस्तूरी विकासखंड के ग्राम जयरामनगर-खैर की रहने वाली श्रीमती बृहस्पति साहू, जो लंबे समय से फल विक्रय कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, के लिए पहले हर दिन एक संघर्ष था। फल मंडी से माल लाना हो या दुकान की अन्य व्यवस्थाएं, उन्हें दूसरों की मदद का मोहताज होना पड़ता था। मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल मिलने के बाद बृहस्पति के चेहरे पर एक अलग ही आत्मविश्वास है। वे कहती हैं, “यह सिर्फ एक मशीन नहीं, मेरे लिए आजादी है। अब मैं अपना काम समय पर और बिना किसी की राह देखे कर पाऊंगी।”

वहीं, कोटा विकासखंड के ग्राम बछलीखुर्द (रतनपुर) के निवासी श्री विष्णु सिंह राजपूत, जो जनरल स्टोर का संचालन करते हैं, के लिए अब बाजार जाकर थोक खरीदारी करना चुटकियों का काम हो गया है। विष्णु बताते हैं, “दुकान के लिए सामान ढोने की चुनौती ने हमेशा मेरे व्यवसाय की गति को धीमा रखा था। अब मैं खुद बाजार जाकर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकूंगा। आत्मनिर्भरता का यह एहसास अमूल्य है।”

सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने की राह​

समाज कल्याण विभाग की यह पहल महज एक सरकारी सहायता नहीं है, बल्कि उन जैसे अनेक दिव्यांग जनों के लिए सम्मान और गरिमा के साथ जीने का एक सशक्त जरिया बनी है। यह मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर, उनके सपनों को पंख देने का काम कर रही है। बृहस्पति और विष्णु की यह कहानी उन हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अभावों के बावजूद अपने सपनों को जीवित रखे हुए हैं।

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