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​राज किशोर नगर का बुरा हाल: कहीं सड़क पर बहता ‘अमृत’ तो कहीं बीच रास्ते खड़े ‘मौत के खंभे’; धूल के गुबार में घुट रहा है बिलासपुर का दम|

रिपोर्ट:
अमित पवार
प्रधान संपादक, खबर ताज़ा न्यूज

बिलासपुर (राज किशोर नगर): स्मार्ट सिटी बिलासपुर के राज किशोर नगर क्षेत्र में इन दिनों प्रशासन की ऐसी ‘अजीबोगरीब’ इंजीनियरिंग और लापरवाही देखने को मिल रही है, जो किसी भी वक्त एक बड़े हादसे को दावत दे सकती है। यहाँ स्मृति वन के पास मुख्य मार्ग पर चल रहा निर्माण कार्य अब जनता के लिए जी का जंजाल बन चुका है।

सड़क के बीचों-बीच ‘मौत के खंभे’: क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार है?
​सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि राज किशोर नगर क्षेत्र में प्रस्तावित 80 फीट मुख्य मार्ग के निर्माण के बीचों-बीच बिजली के खंभे (Electric Poles) जस के तस खड़े हैं। सड़क चौड़ी कर दी गई है, लेकिन इन खंभों को शिफ्ट नहीं किया गया। तेज़ रफ्तार वाहनों के लिए ये खंभे किसी ‘मौत के जाल’ से कम नहीं हैं। आम जनता इन खंभों से बच-बचकर निकलने को मजबूर है। रात के अंधेरे में यहाँ स्थिति और भी डरावनी हो जाती है।
​बड़ा सवाल: क्या प्रशासन को इन खंभों को हटाने के लिए किसी की जान जाने का इंतज़ार है? आखिर बिना बिजली विभाग के तालमेल के सड़क का काम कैसे शुरू कर दिया गया?

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सफेद धूल और सीमेंट डस्ट की चादर: थम गया विकास का पहिया
​पिछले 15-20 दिनों से किसी अज्ञात कारण से सड़क का काम बंद पड़ा है। अधूरी खुदी सड़क और फैलाई गई सफेद सीमेंट डस्ट ने पूरे इलाके को धूल के गुबार में तब्दील कर दिया है। राहगीरों और स्थानीय निवासियों का दम घुट रहा है। दुकानों और घरों के भीतर तक डस्ट की मोटी परत जम चुकी है, जिससे लोगों को सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

15 दिनों से बह रहा है लाखों लीटर पानी
​इसी मार्ग पर पिछले 15 दिनों से मुख्य पाइपलाइन टूटी हुई है, जिससे लाखों लीटर पीने का पानी सड़क पर बहकर बर्बाद हो रहा है। सड़क पर कीचड़ और धूल का मिश्रण एक तरफ फिसलन पैदा कर रहा है, तो दूसरी तरफ जनता की गाढ़ी कमाई का पानी नाली में जा रहा है।

​’खबर ताज़ा’ के सीधे सवाल:
​नगर निगम और बिजली विभाग में तालमेल क्यों नहीं? सड़क के बीचों-बीच खड़े खंभों को अब तक क्यों नहीं हटाया गया?
​काम बंद क्यों? आखिर क्यों 20 दिनों से निर्माण कार्य ठप है और जनता धूल फांकने को मजबूर है?
​पानी की बर्बादी का दोषी कौन? 15 दिनों से बह रहे अमृत समान पानी को रोकने की सुध किसी ने क्यों नहीं ली?

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ग्राउंड जीरो की हकीकत: जब ‘खबर ताज़ा’ के प्रधान संपादक ने क्षेत्र के निवासियों से बात की, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल कागजों पर विकास कर रहा है, धरातल पर तो सिर्फ लापरवाही और जानलेवा खतरे ही नज़र आ रहे हैं।

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