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बिलासपुर | 7 मार्च, 2026
विशेष रिपोर्ट: अमित पवार (प्रधान संपादक)
महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आज बिलासपुर जिले के ग्रामीण अंचलों से सशक्तिकरण की ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो समाज के लिए एक मिसाल हैं। कल तक घर की दहलीज तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के संबल से न केवल आर्थिक रूप से आजाद हो रही हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए ‘रीढ़ की हड्डी’ साबित हो रही हैं।
महतारी वंदन और बिहान योजना से बदली सूरत
जिले के कोटा विकासखंड के ग्राम जुरेली की सुशीला बाई और सिलपहरी की उर्वशी भानू की कहानी आज हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो अभावों में जी रही थी। सुशीला बाई बताती हैं कि ‘महतारी वंदन योजना’ के तहत मिलने वाली 1000 रुपये की मासिक राशि और स्व-सहायता समूह के साथ जुड़ाव ने उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया है। वहीं उर्वशी भानू ने समूह के माध्यम से ‘टेंट व्यवसाय’ शुरू कर अपनी आमदनी का नया जरिया खड़ा कर लिया है।
रेशम की डोर से बुनी कामयाबी: विजेता कोरी की कहानी
बेलतरा विधानसभा के रमतला की विजेता रामसनेही (अन्नू कोरी) ने तो कामयाबी के नए आयाम स्थापित कर दिए हैं। रेशम और कोसा बीज उत्पादन के क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण लेकर उन्होंने महज एक माह में 12 हजार कोसा बीज तैयार किए। उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए केंद्रीय रेशम बोर्ड ने उन्हें सम्मानित भी किया है। आज विजेता के पास प्रधानमंत्री आवास योजना से अपना पक्का घर है और वे मछली पालन के जरिए अपनी आय को और बढ़ा रही हैं।

नवाचार: कर्रा गांव का ‘बर्तन बैंक’
पर्यावरण संरक्षण और व्यापार को एक साथ जोड़ते हुए मस्तूरी के ग्राम कर्रा की महिलाओं ने ‘बर्तन बैंक’ की एक अनूठी शुरुआत की है। गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष गौरी यादव का कहना है कि गांव में शादी-ब्याह के दौरान होने वाले प्लास्टिक कचरे को रोकने के लिए उन्होंने स्टील के बर्तन किराए पर देने का काम शुरू किया। इससे प्रदूषण तो कम हुआ ही, समूह की महिलाओं के लिए आय का एक स्थायी स्रोत भी बन गया।


योजनाएं अब केवल कागजों पर नहीं
बिलासपुर के इन गांवों का दौरा करने पर स्पष्ट दिखता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही योजनाएं अब जमीन पर उतर चुकी हैं। चाहे वह ‘बिहान’ योजना हो या ‘महतारी वंदन’, इन प्रयासों ने ग्रामीण महिलाओं को सम्मान के साथ जीने की नई राह दिखाई है। आज की ये महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि वे विकसित भारत के संकल्प की मजबूत कड़ी बन चुकी हैं।


अमित पवार (प्रधान संपादक)
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