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रिपोर्ट:अमित पवार प्रधान संपादक

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): न्यायधानी के टिकरापारा क्षेत्र में इस वर्ष होलिका दहन का नजारा कुछ अलग और प्रेरणादायक होने वाला है। माँ गणेश उत्सव समिति, टिकरापारा द्वारा पर्यावरण को शुद्ध रखने और पेड़ों की कटाई रोकने के संकल्प के साथ इस बार 5100 गाय के गोबर के कंडों से होलिका दहन करने का निर्णय लिया गया है।
लकड़ी मुक्त होली का संकल्पआमतौर पर होलिका दहन के लिए भारी मात्रा में लकड़ियों का उपयोग किया जाता है, जिससे पेड़ों का नुकसान होता है। समिति के सदस्यों का कहना है कि कंडों के उपयोग से न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहता है, बल्कि दहन के बाद निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध करता है और हानिकारक कीटाणुओं का नाश करता है।

समिति द्वारा तैयार की गई होलिका आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। फोटो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि समिति ने अपनी झांकी और सजावट में भी पारंपरिक कला को प्राथमिकता दी है। 5100 कंडों का यह विशाल ढेर बिलासपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है। टिकरापारा के निवासियों ने समिति के इस ‘इको-फ्रेंडली’ कदम की जमकर सराहना की है।

समिति का संदेशमाँ गणेश उत्सव समिति ने शहरवासियों से अपील की है कि वे भी अपनी कॉलोनियों और मोहल्लों में लकड़ियों की जगह कंडों का अधिक से अधिक उपयोग करें। इससे गौशालाओं को आर्थिक मजबूती मिलेगी और हमारी सनातन परंपरा का वैज्ञानिक रूप भी सामने आएगा।”हमारा उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है। 5100 कंडों का उपयोग इसी दिशा में हमारा एक छोटा सा योगदान है।” > — समिति सदस्य, टिकरापारा

अमित पवार: प्रधान संपादक
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