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बिलासपुर की केरा बाई ने पेश की मिसाल: चूल्हे-चौके से निकलकर ‘लखपति दीदी’ बनने तक का सफर

बिलासपुर | 12 मार्च 2026
अमित पवार (प्रधान संपादक)

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कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और साथ में सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो सफलता की राह खुद-ब-खुद बन जाती है। कुछ ऐसी ही कहानी है जनपद पंचायत बिल्हा के ग्राम निपानिया की रहने वाली केरा बाई की। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली एक साधारण महिला आज पूरे क्षेत्र के लिए ‘प्रेरणापुंज’ बन चुकी हैं।

समूह से मिला हौसला, बाड़ी से बदली किस्मत
​केरा बाई की इस सफलता की नींव तब पड़ी जब उन्होंने ‘एकता स्व-सहायता समूह’ से जुड़ने का फैसला किया। शुरुआती हिचकिचाहट के बाद, समूह की बैठकों ने उनके भीतर वह आत्मविश्वास जगाया जो बरसों से दबा हुआ था। उन्होंने समूह से ऋण लेकर अपनी बाड़ी को अपनी कर्मभूमि बनाया। जहाँ पहले सिर्फ बंजर जमीन दिखती थी, वहां आज केरा बाई की मेहनत से हरी-भरी जैविक सब्जियां लहलहा रही हैं।

आर्थिक मजबूती और महतारी वंदन का सहारा
​बाड़ी से होने वाली आय ने केरा बाई के परिवार की माली हालत बदल दी है। अपनी सफलता साझा करते हुए वे कहती हैं:
​”शुरुआत में डर था, लेकिन समूह के साथ और शासन की योजनाओं ने मेरा हाथ थामा। आज मैं गर्व से कह सकती हूं कि मैं अपने परिवार का संबल हूं। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि मेरी छोटी-छोटी जरूरतों को बिना किसी पर निर्भर हुए पूरा कर देती है।”

विष्णु देव साय सरकार की योजनाओं का जमीनी असर
​केरा बाई अपनी इस कामयाबी का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार को देती हैं। ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में बढ़ते उनके कदम यह बताते हैं कि यदि महिलाओं को आर्थिक आजादी मिले, तो वे समाज की तस्वीर बदल सकती हैं।
​आज केरा बाई न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि भैंसबोड क्लस्टर की दर्जनों महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रशिक्षित और प्रोत्साहित भी कर रही हैं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि सशक्त महिला ही सशक्त छत्तीसगढ़ की असली पहचान है।

अमित पवार (प्रधान संपादक)

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