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बिलासपुर: लिंगियाडीह के गरीबों के आशियाने पर नगर निगम की नजर, ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ ने खोला मोर्चा

ब्यूरो रिपोर्ट:
अमित पवार
प्रधान संपादक, खबर ताज़ा

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बिलासपुर। शहर के लिंगियाडीह क्षेत्र में पिछले कई दशकों से बसे गरीब परिवारों के सिर से छत छिनने का खतरा मंडराने लगा है। नगर निगम द्वारा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और गार्डन बनाने के नाम पर बस्तियों को उजाड़ने की तैयारी के खिलाफ अब स्थानीय निवासियों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ‘मनरेगा बचाओ संग्राम एवं लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन’ के बैनर तले नागरिकों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपनी 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं।

दशकों पुराने आशियानों पर ‘बुलडोजर’ का खौफ
​निवासियों का आरोप है कि नगर निगम विकास के नाम पर उन गरीबों को निशाना बना रहा है जो आसपास के क्षेत्रों में मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि मार्च 2025 में पहले ही 150 से अधिक दुकानों और मकानों को तोड़ा जा चुका है, और अब फिर से 113 मकानों को तोड़ने की साजिश रची जा रही है।

पट्टा वितरण में भेदभाव का आरोप
​आंदोलन के दौरान यह बात प्रमुखता से उठी कि शहर के अन्य इलाकों जैसे मोपका, खमतराई, मंगला और बहतराई में 10 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से प्रीमियम लेकर पट्टा वितरण किया गया है, लेकिन लिंगियाडीह के 505 पात्र हितग्राहियों की सूची तैयार होने के बावजूद उन्हें आज तक पट्टे नहीं दिए गए। निवासियों ने मांग की है कि उन्हें भी उसी नियम के तहत मालिकाना हक दिया जाए।

मास्टर प्लान और बुनियादी सवालों पर घेरा
​स्थानीय लोगों ने तकनीकी सवाल उठाते हुए कहा कि यह भूमि मास्टर प्लान के अनुसार आवासीय है, फिर यहां कमर्शियल निर्माण क्यों किया जा रहा है? साथ ही यह भी आरोप लगाया कि राज किशोर नगर और माखनलाल चतुर्वेदी कॉलोनी जैसे पास के इलाकों में पहले से ही गार्डन के लिए मैदान स्वीकृत हैं, जिनका रख-रखाव निगम नहीं कर पा रहा है और वहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। ऐसे में नई बस्तियां उजाड़कर गार्डन बनाना तर्कसंगत नहीं है।

आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें:
​गरीबों के मकान तोड़ने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगे।
​लिंगियाडीह के पात्र 505 परिवारों को तत्काल पट्टा आवंटित हो।
​आवासीय भूमि पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण बंद किया जाए।
​बच्चों की शिक्षा और रोजी-रोटी को प्रभावित करने वाली विस्थापन नीति रद्द हो।
​फिलहाल, लिंगियाडीह के निवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।

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