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बिलासपुर: सेना की ज़मीन पर अवैध मुरूम खुदाई मामले में हाई कोर्ट सख़्त, 54 बिल्डरों पर गिरी गाज
​रिपोर्टर: अमित पवार (संस्थापक एवं संपादक – खबर ताज़ा)

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलासपुर जिले के चकरभाठा और तेलसरा क्षेत्र में एयरपोर्ट के पास सेना की जमीन से अवैध मुरूम खुदाई के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। खबर ताज़ा को मिली जानकारी के अनुसार, माननीय न्यायालय ने खनिज विभाग को इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने इसे अपनी निरंतर निगरानी (Monitoring) में रखा है।


भारी मात्रा में मुरूम चोरी का खुलासा
​सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि दो मुख्य कंस्ट्रक्शन कंपनियों—डिवाइन ग्रुप और फॉर्च्यून एलीमेंट—द्वारा सेना की आरक्षित जमीन से भारी मात्रा में मुरूम की चोरी की गई। इस अवैध मुरूम का इस्तेमाल केवल इन कंपनियों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर के लगभग 54 अन्य बिल्डर्स और ठेकेदारों ने भी अपनी कॉलोनियों और सड़कों के निर्माण में इस अवैध सामग्री का उपयोग किया है। खनिज विभाग ने अब इन सभी बिल्डर्स पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।


बिल्डर पवन अग्रवाल को बनाया गया पक्षकार
​दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने के बाद शुरू हुई इस सुनवाई में बिल्डर पवन अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कोर्ट के निर्देशानुसार फॉर्च्यून एलीमेंट कॉलोनी के मालिक पवन अग्रवाल को मामले में पक्षकार बनाया गया है। शासन की ओर से बताया गया कि उन्हें नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है।


सेना ने कलेक्टर से की थी शिकायत
​केंद्र सरकार की ओर से पैरवी करते हुए डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने डिवीजन बेंच को जानकारी दी कि सेना की भूमि से अवैध खनन रोकने के लिए बिलासपुर कलेक्टर से पूर्व में ही शिकायत की जा चुकी है।
​खनिज विभाग ने अब तक की गई जांच और कार्रवाई का ब्यौरा कोर्ट में पेश किया है। हाई कोर्ट ने जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तिथि तय की है।

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