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बिलासपुर: मोपका वार्ड-48 में ‘स्मार्ट सिटी’ की पोल, घरों में बह रहा नालियों का गंदा पानी; MIC मेंबर पार्षद की चुप्पी सवालों के घेरे में

रिपोर्ट :- अमित पवार प्रधान संपादक खबर ताजा न्यूज

बिलासपुर: एक तरफ बिलासपुर नगर निगम शहर को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने का दम भर रहा है, वहीं दूसरी ओर मोपका के वार्ड क्रमांक-48 की स्थिति किसी उपेक्षित बस्ती से भी बदतर हो गई है। मानसून की पहली फुहारों के साथ ही यहाँ की जनता के घरों में पानी नहीं, बल्कि नालियों का सड़ांध मारता कचरा और गंदा पानी घुस रहा है।

हैरानी की बात यह है कि इस वार्ड का प्रतिनिधित्व कोई साधारण पार्षद नहीं, बल्कि नगर निगम की एमआईसी (MIC) के सदस्य करते हैं। शहर की नीति-निर्धारक संस्था ‘मेयर-इन-काउंसिल’ में बैठे होने के बावजूद, अपने ही वार्ड की जल-निकासी व्यवस्था को दुरुस्त न कर पाना सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

सत्ता का रसूख या प्रशासनिक विफलता?​वार्डवासियों में इस कदर आक्रोश है कि वे खुलेआम कह रहे हैं कि जब ‘एमआईसी मेंबर’ ही उनके वार्ड की सुध लेने में असमर्थ हैं, तो फिर आम जनता अपनी फरियाद लेकर किसके पास जाए? जनता का आरोप है कि नगर निगम के गलियारों में ऊंची पहुंच रखने वाले पार्षद साहब का ध्यान संभवतः वार्ड की बुनियादी समस्याओं से कहीं ज्यादा शायद निगम की ‘नीतिगत बैठकों’ में व्यस्त रहने में है।

​”कैमरे के सामने दावे, हकीकत में गंदगी का साम्राज्य”​स्थानीय लोगों का कहना है कि कागजों पर सफाई व्यवस्था का जो दावा किया जा रहा है, वह धरातल पर कहीं नजर नहीं आता। सड़कों पर पसरा जलजमाव और घरों में घुसता दूषित पानी उस विकास की असलियत बयां कर रहा है, जिसके दावे चुनाव के दौरान किए गए थे। वार्ड की जनता का सीधा सवाल है: क्या एमआईसी की कुर्सी का रौब जनता की समस्याओं को दबाने के लिए है या उन्हें हल करने के लिए?

यदि जल्द ही जल-निकासी की समस्या का निराकरण नहीं किया गया, तो यह ‘विकास’ का ढोंग जनता के धैर्य को तोड़ देगा। अब देखना यह है कि क्या निगम के जिम्मेदार पद पर बैठे पार्षद साहब अपनी जवाबदेही तय करेंगे या जनता का आक्रोश उन्हें कुर्सी पर रहते हुए भी नींद से जगाने के लिए काफी होगा?

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