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“शिकायतों पर सिर्फ़ आश्वासन, बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे! जर्जर स्कूल भवन पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी सवालों के घेरे में

प्रधान पाठक का दावा—डीईओ, कलेक्टर, नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार दिए गए लिखित आवेदन, फिर भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई। बरसात में खतरे के बीच पढ़ने को मजबूर मासूम।

रिपोर्ट :- अमित पवार प्रधान संपादक खबर ताजा न्यूज

बिलासपुर | विशेष रिपोर्ट बिल्हा विकासखंड के संकुल केंद्र बिजौर अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला कुटीपारा, मोपका का जर्जर भवन आज भी प्रशासनिक लापरवाही की गवाही देता नजर आ रहा है। विद्यालय की दीवारों में गहरी दरारें, छत से लगातार टपकता पानी और हर समय मंडराता हादसे का खतरा… इसके बावजूद मासूम बच्चे इसी भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

खबर ताज़ा न्यूज़ से विशेष बातचीत में विद्यालय की प्रधान पाठक ने दावा किया कि विद्यालय भवन की बदहाल स्थिति को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी, कलेक्टर, नगर निगम, स्थानीय पार्षद तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन दिए गए। लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब संबंधित विभागों को इस खतरे की जानकारी पहले से थी, तब बच्चों की सुरक्षा को लेकर अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेंगे?

बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। छत से टपकते पानी के कारण कक्षाओं में जलभराव की स्थिति बनती है। ऐसे में विद्युत दुर्घटना की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में बच्चों को पढ़ाना किसी चुनौती से कम नहीं है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास के दावे करने वाले जनप्रतिनिधियों को अब इस मुद्दे पर खुलकर सामने आना चाहिए। जब मासूम बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी हो, तब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की जरूरत होती है।

यह मामला केवल एक स्कूल भवन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। यदि शिकायतें वर्षों से संबंधित कार्यालयों तक पहुंचती रहीं, तो आखिर समाधान क्यों नहीं निकला? क्या सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता अब किसी बड़े हादसे की प्रतीक्षा कर रही है?

खबर ताज़ा न्यूज़ जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, नगर निगम और संबंधित जनप्रतिनिधियों से मांग करता है कि विद्यालय का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा नए भवन निर्माण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए।

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