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रिपोर्ट:- अमित पवार प्रधान संपादक, खबर ताज़ा न्यूज
बिलासपुर। बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय टांडे के स्थानांतरण के बाद जिले के शिक्षा महकमे में हलचल तेज हो गई है। इस प्रशासनिक फेरबदल को कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी के खिलाफ अपने लंबे संघर्ष की पहली बड़ी सफलता करार दिया है।
अनियमितताओं के खिलाफ लंबी लड़ाई का परिणामकांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह तबादला महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पिछले कई महीनों से विभाग में चल रही धांधली के खिलाफ उठी आवाज़ का परिणाम है। गौरहा ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण, शिक्षकों के अटैचमेंट, पदोन्नति संशोधन और अनुकंपा नियुक्ति जैसे गंभीर विषयों में नियमों को दरकिनार किया गया।

”सिर्फ तबादला काफी नहीं, दोषियों पर हो कार्रवाई”
अंकित गौरहा ने स्पष्ट किया है कि केवल अधिकारी बदलने से विभाग की व्यवस्था नहीं सुधरेगी। उन्होंने मांग की है कि डीईओ कार्यालय में बाबू सुनील यादव की भूमिका और हाईकोर्ट तथा लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आदेशों की अवहेलना करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। गौरहा ने कहा, “हमने कलेक्टर से लेकर शिक्षा सचिव स्तर तक साक्ष्यों के साथ शिकायतें सौंपी हैं। जिन अपात्र लोगों ने गलत तरीके से लाभ प्राप्त किया है, उनकी निष्पक्ष जांच होनी अनिवार्य है।”
हजारों छात्रों और शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा है मामला
गौरहा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक शिक्षा विभाग पूरी तरह से पारदर्शी नहीं हो जाता और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों और शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा है, जिसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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