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मोर गांव, मोर तरिया’ से बदल रही बिलासपुर के गांवों की सूरत: जल संरक्षण को मिली नई संजीवनी

रिपोर्ट: अमित पवार, प्रधान संपादक

छत्तीसगढ़ शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली जल संरक्षण और संवर्धन योजनाएं अब धरातल पर अपना असर दिखाने लगी हैं। बिलासपुर जिले में चलाए जा रहे ‘मोर गांव, मोर तरिया’ अभियान ने जल प्रबंधन की एक नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट की समस्या से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी।

मानसून से पहले जल संचयन की तैयारी

जिले के जनपद पंचायत मस्तूरी अंतर्गत ग्राम पंचायत बोहारडीह में इन दिनों नवीन तरिया निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। प्रशासन ने मानसून के आगमन को ध्यान में रखते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार की है, ताकि वर्षा शुरू होने से पहले निर्माण कार्य पूर्ण हो सके और वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित किया जा सके। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 38 नवीन तरियों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिन पर तेजी से काम जारी है।

​भू-जल स्तर में सुधार और रोजगार के अवसर

यह अभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है। तरियों के निर्माण में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिकों को नियोजित किया गया है, जिससे उन्हें गांव में ही रोजगार प्राप्त हो रहा है। प्रशासन की ओर से कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इन जल संरचनाओं के बनने से न केवल भू-जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि भविष्य में सिंचाई की सुविधा और मवेशियों के लिए पानी की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

जनआंदोलन बना जल संरक्षण

कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण को अब एक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। इस मुहिम के जरिए प्रशासन ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण की एक मजबूत नींव रख रहा है। आने वाले समय में ये तरिया ग्रामीण जीवन को खुशहाल बनाने और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होंगे।

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