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बिलासपुर: ऊर्जा पार्क के बाहर बेलगाम पार्किंग और अतिक्रमण, क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है?

रिपोर्ट : – अमित पवार प्रधान संपादक

बिलासपुर: शहर के ऊर्जा पार्क के सामने इन दिनों जिस तरह की स्थिति बनी हुई है, वह न केवल चिंताजनक है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर रही है। मुख्य मार्ग पर बेतरतीब खड़ी गाड़ियों और अवैध ठेलों के कारण यहाँ का यातायात पूरी तरह से चरमरा गया है। आम नागरिकों का इस मार्ग से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है।

जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का रवैया​

जब हमने इस विषय पर ऊर्जा पार्क प्रबंधन से वस्तुस्थिति जाननी चाही, तो जो जवाब सामने आया, वह हैरान करने वाला था। पार्क प्रबंधन के कर्मचारियों का कहना है कि यहाँ पार्किंग की सुविधा नि:शुल्क है और आगंतुक अपने अनुसार वाहन खड़ा कर देते हैं, जिसमें संस्थान की कोई जिम्मेदारी नहीं है।​

एक जिम्मेदार संस्थान के तौर पर यह तर्क स्वीकार करने योग्य नहीं है। क्या ‘नि:शुल्क’ होने का अर्थ यह है कि सुरक्षा और सुव्यवस्था की जिम्मेदारी भी ‘शून्य’ कर दी जाए? सार्वजनिक स्थल के बाहर अराजक स्थिति के लिए ‘आगंतुकों की मर्जी’ का हवाला देना अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने जैसा है। यदि पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, तो क्या प्रशासन का यह दायित्व नहीं बनता कि वह किसी वैकल्पिक व्यवस्था की योजना बनाए?

बढ़ता खतरा और ट्रैफिक की समस्या​

सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें और ऊपर से अवैध अतिक्रमण ने मार्ग को संकरा कर दिया है। यह वही मार्ग है जहाँ से रोज हजारों लोग और आपातकालीन एम्बुलेंस गुजरती हैं। जाम की स्थिति यहाँ स्थाई हो चुकी है। जिस स्थान पर शांति और मनोरंजन के लिए लोग जाते हैं, वहीं अव्यवस्था का माहौल देखकर नागरिक स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

ठोस कार्रवाई की दरकार​

यह केवल एक पार्किंग की समस्या नहीं है, यह प्रशासनिक सुस्ती का आईना है। नगर निगम और यातायात विभाग को इस पर तत्काल संज्ञान लेने की आवश्यकता है। हमारी माँग है कि ऊर्जा पार्क के बाहर पार्किंग के लिए एक स्पष्ट और व्यवस्थित स्थान चिन्हित किया जाए।​सड़क किनारे किए गए अवैध अतिक्रमणों को तत्काल हटाया जाए।​

ट्रैफिक पुलिस की निगरानी बढ़ाई जाए ताकि यातायात बाधित न हो।​उम्मीद है कि प्रशासन किसी अप्रिय घटना या बड़ी दुर्घटना के घटित होने से पहले ही सक्रिय होगा।

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