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रिपोर्ट: अमित पवार प्रधान संपादक
राज्य सरकार की बहुप्रतीक्षित ‘मुख्यमंत्री हेल्पलाइन‘ सेवा को धरातल पर उतारने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इसी क्रम में आज जल संसाधन परिसर स्थित प्रार्थना सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली और विभागीय जवाबदेही पर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रशिक्षण सत्र में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल और अपर कलेक्टर श्री शिव कुमार बनर्जी की उपस्थिति में मास्टर ट्रेनर श्री अशोक चौबे ने अधिकारियों को हेल्पलाइन के तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया।
क्या है हेल्पलाइन की खासियत?
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि यह सेवा फिलहाल टेस्टिंग मोड में है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता ‘फीडबैक प्रणाली‘ होगी। शिकायतकर्ता द्वारा दिया गया फीडबैक ही इस पूरी व्यवस्था की सफलता का पैमाना तय करेगा। इसके तहत शिकायतों के ऑनलाइन पंजीयन से लेकर समय-सीमा के भीतर उनके निराकरण और मॉनिटरिंग की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप दिया गया है।
अधिकारियों को कलेक्टर की दो टूक
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजना है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए:”हर शिकायत को केवल एक फाइल या कागजी कार्रवाई न समझें। प्रत्येक समस्या के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखाना अनिवार्य है। हमारा उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक संतुष्टि देना है, ताकि शासन के प्रति आम जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।”

आगामी दिनों में मुख्यमंत्री द्वारा इस सेवा का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा, जिसके बाद आम नागरिकों को अपनी समस्याएं सीधे शासन तक पहुँचाने के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध होगा।
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