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रिपोर्ट:
अमित पवार
प्रधान संपादक, खबर ताज़ा

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): कहते हैं कि यदि मन में अटूट विश्वास और हाथों में मेहनत का हुनर हो, तो कामयाबी की नई इबारत लिखी जा सकती है। इसे सच कर दिखाया है कोटा विकासखंड के आदिवासी बहुल ग्राम करका की सुभद्रा आर्मी ने। कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच जीवन बसर करने वाली सुभद्रा आज छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बिहान’ योजना के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
समूह की शक्ति और सरकारी मदद का मेल
सुभद्रा की सफलता का सफर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत ‘मां सरस्वती समूह’ से जुड़ने के बाद शुरू हुआ। इस मिशन ने न केवल उन्हें आर्थिक संबल दिया, बल्कि स्वरोजगार की नई राह भी दिखाई। सुभद्रा बताती हैं कि शुरुआत में उनके समूह को रिवॉल्विंग फंड (RF) के रूप में 15,000 रुपये, सीआईएफ (CIF) के तहत 60,000 रुपये और बैंक लिंकेज के माध्यम से 3,00,000 रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसी पूंजी के भरोसे उन्होंने खीरे की खेती का बड़ा निर्णय लिया।
बीमा सखी का मार्गदर्शन रहा अहम
इस पूरी यात्रा में बैंकिंग और वित्तीय जटिलताओं को दूर करने में समूह की बीमा सखी हबीबुन निशा का मार्गदर्शन मील का पत्थर साबित हुआ। उन्होंने न केवल ऋण संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाया, बल्कि महिलाओं को वित्तीय साक्षरता प्रदान कर खेती के लिए जरूरी संसाधनों के सही प्रबंधन में भी मदद की।
मुख्यमंत्री का जताया आभार
अपनी खुशहाली का श्रेय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की जनहितैषी योजनाओं को देते हुए सुभद्रा भावुक होकर कहती हैं, “सरकारी योजनाओं ने हमारे जैसे गरीब परिवारों की जिंदगी बदल दी है। आज मैं न केवल अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर पा रही हूं, बल्कि अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दे रही हूं।”
आज करका गांव की यह ‘लखपति दीदी’ जिले की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं, जो यह बताती हैं कि समूह की शक्ति और सही दिशा में की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।

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