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गुजरात विश्वविद्यालय: डॉ. नाज़ेमा अंसारी के मार्गदर्शन में तीसरी पीएच.डी. संपन्न, ‘मज़हरुल हक़ अल्वी’ के व्यक्तित्व और कृतित्व पर हुआ महत्वपूर्ण शोध

रिपोर्ट :- अमित पवार प्रधान संपादक खबर ताजा न्यूज

अहमदाबाद:

गुजरात विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज़ में आयोजित एक विशेष शैक्षणिक सत्र में शोधार्थी शेख हसीना अली मुहम्मद ने अपने शोध-प्रबंध “मज़हरुल हक़ अल्वी: शख्सियत और फ़न” का ओपन वाइवा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह शोध गुजरात आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नाज़ेमा अंसारी के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है।

इस अवसर पर बाह्य परीक्षक के रूप में उपस्थित शिरपुर (महाराष्ट्र) के एस.पी.डी.एम. कॉलेज के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. साजिद अली क़ादरी ने शोध के उच्च स्तर, मौलिकता और शोधार्थी के जवाबों की सराहना की। उन्होंने इस शोध-प्रबंध को डॉक्टरेट की उपाधि देने और आवश्यक संशोधनों के साथ पुस्तक रूप में प्रकाशित करने की अनुशंसा की है।

​इससे पहले अप्रैल 2026 में पूर्ण हुए दो सफल शोधों के बाद, डॉ. नाज़ेमा अंसारी के निर्देशन में यह तीसरी पीएच.डी. पूरी हुई है। यह उपलब्धि गुजरात विश्वविद्यालय के शैक्षणिक इतिहास और उर्दू साहित्य की परंपरा में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।

कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज़ की निदेशक प्रो. नूतन कोटक के स्वागत उद्बोधन से हुई। इस दौरान पीर मुहम्मद शाह लाइब्रेरी के निदेशक प्रो. मुहीयुद्दीन बॉम्बेवाला, गुजरात उर्दू अकादमी के सदस्य ज़ैनुलआबिदीन अंसारी, प्रख्यात समाजसेविका श्रीमती यासमीन वोरा और सूफ़ी इरफ़ान क़ादरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने इस शोध को गुजरात की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया।​कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

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