Popular Posts

गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा और गोहत्या पर केंद्रीय कानून की मांग: छह चरणों में देशव्यापी जनजागरण अभियान शुरू

रिपोर्ट :- अमित पवार प्रधान संपादक खबर ताजा न्यूज

बिलासपुर, 21 जुलाई: गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए जाने और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए एक कड़ा केंद्रीय कानून बनाने की मांग को लेकर देश भर में छह चरणों का एक व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इस संबंध में बिलासपुर से रूपरेखा स्पष्ट करते हुए अभियान से जुड़े भरत महाराज ने कहा कि गौवंश की रक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। जब देश की जनता संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करेगी, तभी इस दिशा में ठोस और निर्णायक परिणाम सामने आएंगे।

इतिहास के पन्नों से लेकर वर्तमान रणनीति तक​

गोहत्या पर प्रतिबंध की यह मांग देश में नई नहीं है। आजादी के समय से ही यह मुद्दा लगातार उठता रहा है। वर्ष 1947 में महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी इस दिशा में कानून की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसके बाद 1964 और 1966 में साधु-संतों के नेतृत्व में बड़े आंदोलन हुए। वर्ष 1966 में करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में हुए आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कई संतों की जान चली गई थी, जिसके चलते वह आंदोलन कमजोर पड़ गया था। इसके बाद 2016 में भी इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन तब अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी।

इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए संत समाज ने इस बार आक्रामक आंदोलन के स्थान पर प्रार्थना, जनसंवाद और जनजागरण को अपनी रणनीति का आधार बनाया है। समाज के हर वर्ग को इस मुहिम से जोड़ने की तैयारी है।

केंद्रीय चरागाह नीति और प्रबंधन में सहभागिता की मांग

​सड़कों पर घूमते असहाय गौवंश की समस्या पर बात करते हुए भरत महाराज ने एक देशव्यापी केंद्रीय चरागाह नीति बनाने की जोरदार मांग की। गौवंश के लिए पर्याप्त चारा, सुरक्षित आश्रय और चरागाह उपलब्ध कराना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। सरकार भले ही गोधाम और अन्य बुनियादी ढांचा तैयार करे, लेकिन इनके संचालन और प्रबंधन में संतों, समाज और जमीनी स्तर पर गौसेवा से जुड़े अनुभवी लोगों की सीधी भागीदारी होनी चाहिए।

छह चरणों की विस्तृत कार्य

योजना​यह पूरा अभियान छह अलग-अलग चरणों में चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा:

​प्रथम चरण: 27 अप्रैल 2026 को देश भर के जिला मुख्यालयों से प्रार्थना पत्र सौंपे गए और लगभग पांच करोड़ हस्ताक्षर केंद्र सरकार तक पहुंचाए गए।

​द्वितीय चरण: 27 जुलाई 2026 को देश भर के जिला मुख्यालयों पर दोबारा प्रार्थना पत्र सौंपे जाएंगे। इस चरण में 15 करोड़ हस्ताक्षर जुटाने का लक्ष्य है।

​तृतीय चरण: 27 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले इस चरण में 20 करोड़ हस्ताक्षर जुटाने की योजना है। इस तरह शुरुआती तीन चरणों में कुल 40 से 45 करोड़ हस्ताक्षर सरकार तक पहुँचाए जाएंगे।​

चतुर्थ चरण: यदि शुरुआती चरणों के बाद भी मांग पूरी नहीं होती है, तो 27 फरवरी 2027 से यह चरण शुरू होगा। इसके तहत देश भर के विभिन्न जिलों से लोगों को दिल्ली बुलाकर सात दिनों तक प्रतिदिन लाखों प्रार्थना पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुँचाए जाएंगे। यह सिलसिला लगभग छह महीने तक चलेगा।

​पंचम चरण: 15 अगस्त 2027 तक मांग पूरी न होने पर 16 अगस्त 2027 से पांचवां चरण शुरू किया जाएगा। इसमें देश भर से 15 से 20 लाख संतों और श्रद्धालुओं के दिल्ली पहुंचकर नौ दिनों तक उपवास पर बैठने की योजना है।

​छठा चरण: यदि पांचों चरणों के बाद भी सरकार कोई निर्णय नहीं लेती है, तो अंतिम चरण में देश भर के संत, सामाजिक संगठन, प्रबुद्धजन और मातृशक्ति के प्रतिनिधि मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे।

अभियान से जुड़ने के लिए संपर्क सूत्र​

इस राष्ट्रव्यापी अभियान और इसकी कार्य-योजना से जुड़ने तथा अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए बिलासपुर जिले से निम्नलिखित प्रतिनिधियों के मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं,

जिन पर आम नागरिक संपर्क कर सकते हैं:​

विपुल शर्मा: 9826187198​

शुभम् दीक्षित: 7208177332

​अतुल सिंह: 9826450411​

कृष्णा सिंह: 9827164870​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *