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थिएटर केवल कला नहीं, जीवन जीने का सलीका है: बिलासपुर पहुंचे प्रसिद्ध अभिनेता रघुवीर यादव

रिपोर्ट: अमित पवार, प्रधान संपादक खबर ताजा न्यूज

बिलासपुर। फिल्म ‘लगान’ और ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ जैसे कालजयी कार्यों से दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाने वाले दिग्गज अभिनेता और रंगमंच कलाकार रघुवीर यादव ने कहा है कि आज के दौर में हर स्कूल, कॉलेज और गाँव में थिएटर का होना अनिवार्य है। चार दिवसीय ‘योगेश स्मृति’ नाटक समारोह में सम्मिलित होने बिलासपुर पहुंचे रघुवीर यादव ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए अभिनय, रंगमंच और जीवन के दर्शन पर खुलकर अपने विचार रखे।

हबीब तनवीर और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को किया यादप्रख्यात कलाकार हबीब तनवीर और सत्यदेव दुबे को नमन करते हुए रघुवीर यादव ने कहा कि हबीब साहब ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, नाचा और गम्मत को विश्वपटल पर पहचान दिलाई। उन्होंने आह्वान किया कि हमें अपनी लोक संस्कृति और लोक गीतों को संजोकर रखना चाहिए। हमारी जमीनें और हमारी पहचान गायब नहीं होनी चाहिए।

संगीत है तनाव का सबसे बड़ा उपचार

रघुवीर यादव ने कहा कि एक कलाकार को संगीत में भी रुचि रखनी चाहिए। संगीत जीवन के छोटे-छोटे जज्बातों को बारीकी से समझने में मदद करता है और यह तनाव दूर करने का सबसे अच्छा साथी है। उन्होंने माना कि अभिनय और प्रशिक्षण के बिना कोई भी कलाकार रंगमंच पर लंबे समय तक नहीं टिक सकता।

समाजवादी फिल्मों पर जताई चिंता

आज की फिल्म इंडस्ट्री पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि फिल्मों में समाज को दिशा दिखाने वाली बात होनी चाहिए। किसी अपराधी या बड़े नेता के जीवन पर आधारित फिल्मों को समाज किस हद तक स्वीकार करेगा, इस पर विचार करने की जरूरत है। 1967 से रंगमंच से जुड़े रघुवीर यादव ने कहा कि मुझे आज भी लगता है कि अभी बहुत कुछ सीखना और करना बाकी है।

बिलासपुर आगमन पर सिम्स के डॉ. रमणेश मूर्ति, उनकी पत्नी, अग्रज नाटक दल के प्रमुख सुनील चिपड़े और श्वेता पांडे ने पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका भव्य स्वागत किया। रघुवीर यादव आगामी दो दिनों तक बिलासपुर में रहेंगे और अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

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