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रिपोर्ट: अमित पवार, प्रधान संपादक खबर ताजा न्यूज
देश में सहकारिता आंदोलन को नई गति और दिशा देने वाले सहकारिता मंत्रालय के गठन के पाँच गौरवशाली वर्ष पूर्ण हो गए हैं। इस महत्वपूर्ण पड़ाव को चिह्नित करते हुए, मंत्रालय ने आगामी ‘सहकारिता सप्ताह’ के भव्य आयोजन की विस्तृत रूपरेखा घोषित कर दी है। यह सप्ताह न केवल मंत्रालय की अब तक की उपलब्धियों को प्रदर्शित करेगा, बल्कि भविष्य में ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए एक रोडमैप भी तैयार करेगा।
सहकारिता आंदोलन को मिला नया आयामबीते पाँच वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के डिजिटलीकरण, नई बहु-राज्य सहकारी समितियों के गठन और सहकारी क्षेत्र में पारदर्शिता लाने जैसे अभूतपूर्व कार्य किए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य जमीनी स्तर पर किसानों, युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना रहा है।
सहकारिता सप्ताह की प्रमुख रूपरेखा:मंत्रालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, सप्ताह भर चलने वाले इस आयोजन में कई प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
डिजिटल सहकारिता: सहकारी समितियों के कामकाज को पूरी तरह तकनीक से जोड़कर उनकी दक्षता बढ़ाने पर जोर।
युवा एवं महिला भागीदारी: सहकारी क्षेत्र में नए स्टार्टअप और महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका को बढ़ावा देने के लिए विशेष सत्र।
कृषि और विपणन: किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सहकारी विपणन तंत्र को और अधिक मजबूत करना।
जागरूकता अभियान: देश के दूरदराज के क्षेत्रों में सहकारी समितियों के लाभ और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुँचाने के लिए संगोष्ठियाँ।
’सहकार से समृद्धि’ का लक्ष्यइस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि सहकारिता का अर्थ केवल व्यापार नहीं, बल्कि सामूहिक प्रगति है। इन पाँच वर्षों में मंत्रालय ने जिस प्रकार सहकारिता को आम जनमानस की कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया है, वह एक बड़ी उपलब्धि है। आगामी सप्ताह का मुख्य उद्देश्य इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए जमीनी स्तर पर चल रही सहकारी गतिविधियों में और अधिक गतिशीलता लाना है।
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