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“40 डिग्री की तपिश में शिक्षा का इम्तिहान: क्या बच्चों की सेहत से बड़ा है स्कूल खोलने का फैसला?

रिपोर्ट : – अमित पवार प्रधान संपादक खबर ताजा न्यूज

विशेष रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ में आसमान से आग बरस रही है। तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंच चुका है, उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है और मौसम विभाग लगातार गर्मी व असहज मौसम की चेतावनी दे रहा है। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस भीषण मौसम में छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल भेजने की इतनी जल्दबाजी क्यों?

सुबह-सुबह भारी बस्ता उठाकर स्कूल पहुंचने वाले मासूम बच्चों के चेहरे पर शिक्षा का उत्साह कम और गर्मी की थकान ज्यादा दिखाई दे रही है। स्कूल पहुंचने तक बच्चे पसीने से तर-बतर हो रहे हैं। केवल बच्चे ही नहीं, शिक्षक, पालक और स्कूल स्टाफ भी इस असहनीय गर्मी और उमस से परेशान हैं।

अभिभावकों का कहना है कि जब बड़े-बड़े लोग दोपहर की धूप से बचने की सलाह दे रहे हैं, तब नन्हे बच्चों को इस मौसम में नियमित स्कूल भेजना समझ से परे है। कई पालकों ने छुट्टियां बढ़ाने की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास है, न कि उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में जोखिम के बीच धकेलना। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या निर्णय लेने वाले अधिकारियों ने कभी इस मौसम में भारी बस्ता लेकर स्कूल जाने वाले बच्चों की स्थिति को महसूस किया है?

गर्मी और उमस का असर केवल बच्चों पर नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर दिखाई दे रहा है। कक्षाओं में एकाग्रता प्रभावित हो रही है, शिक्षक असहज हैं और अभिभावक लगातार चिंता में हैं। ऐसे में यह अपेक्षा की जा रही है कि जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा विभाग संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

सवाल जो जवाब मांग रहे हैंक्या बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से बढ़कर कोई प्रशासनिक निर्णय हो सकता है?क्या मौसम की वास्तविक परिस्थितियों का आकलन किए बिना स्कूल संचालन उचित है?क्या शिक्षा विभाग बच्चों की सुविधा को प्राथमिकता देगा या केवल कैलेंडर पूरा करने पर जोर रहेगा?

बच्चों का बचपन किसी प्रयोगशाला का विषय नहीं है। शिक्षा जरूरी है, लेकिन उससे पहले जरूरी है बच्चों का सुरक्षित और स्वस्थ रहना। अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर विषय पर संवेदनशील निर्णय लेते हैं या नहीं।

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