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बिलासपुर को मिली हाईटेक फोरेंसिक वैन, अब वैज्ञानिक साक्ष्यों से होगी अपराधों की तेज और सटीक विवेचना

रिपोर्ट:- अमित पवार
प्रधान संपादक

अपराधों की विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में बिलासपुर पुलिस को बड़ी उपलब्धि मिली है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उप महानिरीक्षक रजनेश सिंह के नेतृत्व में शनिवार को आधुनिक सुविधाओं से लैस फोरेंसिक वैन को औपचारिक रूप से सीन ऑफ क्राइम यूनिट एवं क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) बिलासपुर को सौंपा गया।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में फोरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अत्याधुनिक वाहन के माध्यम से अब घटनास्थल पर तत्काल पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलित किए जा सकेंगे, जिससे अपराधों की जांच अधिक मजबूत होगी और न्यायालय में आरोप सिद्ध करने में सहायता मिलेगी।

नवीन आपराधिक कानून लागू होने के बाद सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले मामलों में एफएसएल जांच अनिवार्य कर दी गई है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पुलिस विभाग को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से सुसज्जित किया जा रहा है, ताकि घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से एकत्रित कर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा जा सके।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि अपराधियों को कठोर सजा मिले और पीड़ित पक्ष को त्वरित न्याय प्राप्त हो। इसके लिए पुलिस प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़ाने हेतु आधुनिक उपकरण और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

विधायक अमर अग्रवाल ने कहा कि सरकार लगातार इस दिशा में प्रयासरत है कि पुलिस व्यवस्था और अधिक मजबूत हो, जिससे आम जनता को न्याय और अपराधियों को सख्त सजा सुनिश्चित की जा सके।

इस अवसर पर विधायक धर्मजीत सिंह, विधायक सुशांत शुक्ला, विधायक अटल श्रीवास्तव, महापौर पूजा विधानी, संभागायुक्त सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं संयुक्त संचालक एफएसएल डॉ. शिखा तिवारी सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। माननीय उप मुख्यमंत्री अरुण साव तथा विधायक धरमलाल कौशिक ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर पुलिस प्रशासन को शुभकामनाएं दीं।

फोरेंसिक वैन में ऐसे अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं जिनकी सहायता से घटनास्थल पर ही खून के धब्बे, बाल, लार, गन पाउडर रेसिड्यू, बुलेट होल, आगजनी, विस्फोटक सामग्री, पदचिह्न और टायर मार्क जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों का प्रारंभिक परीक्षण किया जा सकेगा। इससे साक्ष्यों के नष्ट होने की संभावना कम होगी और जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी।

कार्यक्रम के दौरान सीन ऑफ क्राइम यूनिट के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. समीर कुर्रे एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी रवि चंदेल ने डमी क्राइम सीन तैयार कर पुलिस अधिकारियों एवं उपस्थित लोगों को वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों के माध्यम से अपराधियों की पहचान अब अधिक सटीकता और प्रमाणिकता के साथ संभव हो सकेगी।

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