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प्रशासनिक फाइलों में ‘सुनियोजित’, जमीनी हकीकत में ‘बदहाल’: माखनलाल चतुर्वेदी नगर और केसर आवास कॉलोनी के बाशिंदे बुनियादी सुविधाओं को तरसे।

रिपोर्ट: अमित पवार
प्रधान संपादक
खबर ताज़ा न्यूज़, बिलासपुर (छ.ग.)
बिलासपुर | नगर निगम के वार्ड क्रमांक 52 (जोन 07) में आने वाला राजकिशोर नगर का एक बड़ा हिस्सा आज सिस्टम की विफलता का जीवित प्रमाण बन चुका है। बिलासपुर विकास प्राधिकरण (B.D.A.) द्वारा करीब ढाई दशक पहले विकसित की गई ‘मक्खनलाल चतुर्वेदी नगर’ और ‘केसर आवास कॉलोनी’ आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। विडंबना यह है कि शहर के इस रिहायशी इलाके में रहने वाले लोग नियमित रूप से निगम को टैक्स दे रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें मिल रही हैं जर्जर सड़कें और सीवरेज मिला हुआ दूषित पानी।

जनता की हुंकार: “अब टैक्स देंगे न चुप्पी साधेंगे”
कॉलोनी के निवासियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही निम्नलिखित सुधार नहीं किए, तो वे उग्र आंदोलन और ‘टैक्स बंदी’ जैसा कदम उठाने को विवश होंगे:
सड़कों का प्राथमिकता के आधार पर पुनर्निर्माण।
पेयजल और सीवरेज लाइन का तत्काल पृथक्करण।
सीमांकन विवाद को सुलझाकर जवाबदेही तय करना।
संपादकीय टिप्पणी:
BDA द्वारा ‘पॉश’ कॉलोनी के नाम पर बेचे गए ये भूखंड आज प्रशासनिक उदासीनता के स्मारक बन गए हैं। क्या स्मार्ट सिटी का सपना देख रहे बिलासपुर के अधिकारियों को इन 250 परिवारों की तकलीफें दिखाई नहीं देतीं?

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