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झूले हटे, लेकिन मैदान नहीं हुआ दुरुस्त; मलबे और गड्ढों से खिलाड़ियों की परेशानी जारी

रिपोर्ट : – अमित पवार प्रधान संपादक खबर ताजा न्यूज

बिलासपुर। साइंस कॉलेज मैदान में झूले लगाए जाने को लेकर सामने आया विवाद भले ही अब पुराना हो चुका है, लेकिन झूले हटाए जाने के करीब एक महीने बाद भी मैदान की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। मैदान से झूले तो हटा दिए गए हैं, लेकिन जगह-जगह मलबा, कचरा और गड्ढे अब भी नजर आ रहे हैं। इससे मैदान में अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

झूले हटने के बाद खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि मैदान की सफाई कर गड्ढों को भरते हुए इसे दोबारा खेल गतिविधियों के लिए व्यवस्थित किया जाएगा। हालांकि, करीब एक महीने का समय बीत जाने के बाद भी मैदान की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।

खिलाड़ियों के मुताबिक मैदान में जगह-जगह पड़ा मलबा और गड्ढे अभ्यास के दौरान परेशानी का कारण बन रहे हैं। दौड़ और अन्य खेल गतिविधियों के दौरान असमतल जमीन खिलाड़ियों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। खिलाड़ियों का कहना है कि खेल मैदान को साफ-सुथरा और सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि यहां नियमित रूप से अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को किसी तरह की दिक्कत न हो।

नवरात्रि से पहले मैदान को व्यवस्थित करने की जरूरत

आने वाले दिनों में नवरात्रि का पर्व भी शुरू होने वाला है। ऐसे में मैदान में किसी आयोजन या अन्य गतिविधि की संभावना को देखते हुए साफ-सफाई और समतलीकरण का काम समय रहते पूरा किया जाना जरूरी है। फिलहाल मैदान की स्थिति को देखते हुए यह काम प्राथमिकता के साथ किए जाने की जरूरत नजर आ रही है।

कॉलेज प्रबंधन और नगर निगम की भूमिका पर सवाल

मैदान की मौजूदा स्थिति को लेकर कॉलेज प्रबंधन और नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि झूले हटाए जाने के बाद मैदान की सफाई, मलबा हटाने और गड्ढों को भरने की जिम्मेदारी किस विभाग या संस्था की है और इस दिशा में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

खिलाड़ियों का कहना है कि कॉलेज प्रबंधन और नगर निगम आपसी समन्वय से मैदान की स्थिति सुधार सकते हैं। यदि जल्द सफाई, मलबा हटाने और समतलीकरण का काम कराया जाता है, तो खिलाड़ियों को राहत मिलने के साथ मैदान भी दोबारा व्यवस्थित हो सकेगा।फिलहाल खिलाड़ियों की मांग है कि मैदान से मलबा और कचरा तत्काल हटाया जाए, गड्ढों को भरा जाए और पूरे मैदान को खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित बनाया जाए।

करीब एक महीने से मैदान की स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब देखना होगा कि संबंधित जिम्मेदार इस समस्या पर कब तक ध्यान देते हैं और खिलाड़ियों को कब तक राहत मिलती है।

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