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रिपोर्ट : – अमित पवार प्रधान संपादक खबर ताजा न्यूज
बिलासपुर। शहर में बेजुबान खच्चरों पर क्रूरता और रेस्क्यू के बाद उन्हें नियम विरुद्ध तरीके से ईंट-भट्ठे भेजे जाने का गंभीर मामला सामने आया है। मोपका गोठान में संरक्षित रखे गए 7 खच्चरों को अचानक वहां से हटाकर ईंट-भट्ठे पहुंचाए जाने को लेकर पशु प्रेमियों में भारी आक्रोश है। इस मामले में बिलासपुर के पशु सेवकों ने मोपका पुलिस चौकी (थाना सरकंडा) में लिखित आवेदन देकर महापौर पूजा विधानी, उनके पति अशोक विधानी, महापौर के पीए और नगर निगम जोन-7 के कमिश्नर की भूमिका की जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

आवेदन में पशु प्रेमियों ने खोला पूरा घटना क्रम
थाना प्रभारी मोपका चौकी को दिए गए शिकायत पत्र में पशु सेवकों ने बताया कि 20 अगस्त 2026 को तिफरा क्षेत्र में खच्चरों के साथ क्रूरता का वीडियो सामने आया था। मौके पर जाने पर पता चला कि कुछ लोग पिछले 3-4 महीनों से इन खच्चरों को कमरे में बंद रखकर भूखा-प्यासा पीट रहे थे। इसके बाद संबंधित थाने की पेट्रोलिंग टीम की मौजूदगी में नगर निगम की गाड़ी से 6 खच्चरों को तिफरा से और 1 खच्चर को जरहाभाटा से रेस्क्यू कर सुरक्षित मोपका गोठान में रखवाया गया था।
पशु सेवकों का कहना है कि वे पिछले डेढ़ महीने से नियमित रूप से इन बेजुबानों की देखरेख और खान-पान का पूरा इंतजाम खुद कर रहे थे।

बिना मालिकाना हक की पुष्टि ईंट-भट्ठे भेजने का आरोप
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि 8 अक्टूबर 2026 की सुबह पशु प्रेमियों को बिना कोई सूचना दिए महापौर के पीए और जोन कमिश्नर (जोन-7) द्वारा बिना किसी वैध दस्तावेज या प्रमाण की जांच किए इन खच्चरों को अशोक विधानी के ईंट-भट्ठे भेज दिया गया। पशु प्रेमियों का कहना है कि इनमें से कई खच्चर बेहद कमजोर और बीमार हालत में हैं, जिन्हें दोबारा भट्ठे के भारी काम में झोंकना पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का खुला उल्लंघन है। उन्होंने पुलिस से खच्चरों को तत्काल वापस दिलाने और जिम्मेदारों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।


महापौर का दावा: मालिक ने शुल्क जमा कर वापस लिए खच्चर
वहीं दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर महापौर पूजा विधानी का कहना है कि खच्चरों के मूल मालिक ने नगर निगम से संपर्क कर अपने जानवरों के मोपका गोठान में होने की जानकारी दी थी। उनके अनुसार, नगर निगम के जोन-7 कमिश्नर के जरिए तय प्रक्रिया और निर्धारित शुल्क जमा करवाकर खच्चरों को उनके वास्तविक मालिक को सुपुर्द किया गया है।

जांच के बाद ही साफ होगी स्थितिपशु प्रेमियों के गंभीर आरोपों और निगम प्रशासन के दावों के बीच अब गेंद पुलिस के पाले में है। पुलिस में दर्ज शिकायत के आधार पर इस बात की जांच की जा रही है कि खच्चरों की सुपुर्दगी किन नियमों के तहत की गई, क्या उनका मालिकाना हक साबित हुआ था और उन्हें गोठान से सीधे ईंट-भट्ठे क्यों ले जाया गया।
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